अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बृहस्पतिवार को रुपया आठ पैसे कमजोर होकर 85.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। अमेरिकी मुद्रा में मजबूती और आयातकों की डॉलर मांग के चलते रुपये पर दबाव बना। हालांकि, विदेशी पूंजी प्रवाह से रुपये को कुछ हद तक समर्थन मिला।
डॉलर मजबूत, ट्रंप की नई शुल्क नीति का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित वाहनों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के बाद डॉलर को मजबूती मिली। यह नया शुल्क दो अप्रैल से लागू होगा, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ गई है।
रुपये पर असर डालने वाले कारक
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये पर गिरावट का दबाव मुख्य रूप से तीन कारणों से बढ़ा:
- मासांत में आयातकों की डॉलर मांग – महीने के अंत में आमतौर पर डॉलर की मांग बढ़ती है।
- कैश फ्लो की अस्थिरता – नकदी की कमी और बाजार में जवाबी शुल्क लागू होने की चिंताओं ने भी रुपये को कमजोर किया।
- डॉलर इंडेक्स की हलचल – छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 0.11 प्रतिशत गिरकर 104.43 पर रहा।
रुपये का उतार-चढ़ाव: 85.90 पर खुला, 85.77 पर बंद
बाजार में रुपया 85.90 प्रति डॉलर पर खुला, और दिन के दौरान 85.73 के उच्चतम तथा 85.93 के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा। अंत में यह 85.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले दिन के 85.69 के मुकाबले आठ पैसे की गिरावट दर्शाता है।
कच्चे तेल और शेयर बाजार का प्रभाव
- अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड 0.46 प्रतिशत गिरकर 73.45 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
- घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख दिखा, जहां बीएसई सेंसेक्स 317.93 अंक बढ़कर 77,606.43 पर और निफ्टी 105.10 अंक बढ़कर 23,591.95 पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों की बाजार में बढ़ी सक्रियता
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 2,240.55 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे बाजार में स्थिरता देखने को मिली। हालांकि, रुपये पर डॉलर की मजबूती के चलते दबाव बना हुआ है।